राजनीति: पैर पसारते चीन से खतरे

बिना किसी दस्तावेजी प्रमाण और संधि के भी चीन अपने आसपास के इलाकों पर दावा ठोक सकता है। चीन के भौगोलिक विस्तारवाद का वैचारिक आधार नहीं है। वहीं चीन इतिहास के प्रमाणों को तोड़-मरोड़ कर अपने विस्तारवाद को अंजाम देता रहा है। चीन का भौगोलिक विस्तारवाद चीन की अपनी सुविधा वाले साक्ष्यों पर ही आधारित है। बेशक इन साक्ष्यों को अंतराष्ट्रीय मान्यता हासिल नहीं है।

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